Handloom Blues-Kramshah (क्रमशः)

Typically, a handloom banarasi saree is not made in factories. While as manufacturers we provide all the resources, yarns, and designs, many of our weavers prefer to weave at their respective homes as per their own free will and timing. Often this makes for very interesting conversations. Written in common weaving jargon in a repetitive blues tone, Kramshah (क्रमशः) is one such light-hearted exchange where I ask Jumman, one of our home-weavers, on the status of a saree he is weaving for us.

Hope you enjoy reading it. Please do leave your comments before leaving.

 

क्रमशः

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

बस उम्मन भईया, तानी तना गवी है, आठ-दस रोज में पुजा जइये।।

 

दुई-रोज़ बाद

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

बस उम्मन भईया, बाना रंगा गवा है, आठ-दस रोज में पुजा जइये।।

 

चार-रोज़ बाद

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

बस उम्मन भईया, नक्सा खींचा गवा है, आठ-दस रोज में पुजा जइये।।

 

छः-रोज़ बाद

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

बस उम्मन भईया, पत्ता कटा गवा है, आठ-दस रोज में पुजा जइये।।

 

सात-रोज़ बाद

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

बस उम्मन भईया, नलिया भरा गवी है, आठ-दस रोज में पुजा जइये।।

 

आठ-रोज़ बाद

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

का कही उम्मन भईया, तनिया पे बिलईया कूद गवी, दूसर तानी लगाए पड़ीये।।

 

दस-रोज़ बाद

का हो जुम्मन मियाँ, तोरी सड़िया कब तक बिनइये।

बस उम्मन भईया, तानी तना गवी है, आठ-दस रोज में पुजा जइये।।

 

क्रमशः।

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